- उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में गुरुवार को बड़ा धमाका हो गया। किद्दूवाला में एक कबाड़ी की दुकान में अचानक धमाका हो गया। हादसे में कुल आठ लोगों के घायल होने की सूचना है। इसमें से एक युवक का हाथ शरीर से अलग हो गया। जबकि तीन लोग जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। बताया जा रहा है कि कूड़ा बीनते समय एक कबाड़ी को आर्मी फायरिंग रेंज में बम मिला था। इसी बम को कबाड़ी हथौड़े से तोड़कर अलग कर रहे थे। इसी बीच धमाका हो गया।देहरादून पूलिस के अनुसार थाना रायपुर को 108 के माध्यम से सूचना प्राप्त हुई कि किद्दूवाला लेन न0-3, में एक कबाडी की दुकान में धमाका हुआ है, जिसमें दुकान में मौजूद कुछ व्यक्ति घायल हो गये है। उक्त सूचना पर तत्काल थाना रायपुर से पुलिस बल, दमकल के वाहन तथा बीडीएस की टीम मौके पर पहुंची तथा मौके पर घायल व्यक्तियो को उपचार हेतु कोरोनेशन तथा दून अस्पताल भिजवाया गया। घटना के सम्बंध में जानकारी करने पर ज्ञात हुआ कि उक्त दुकान के मालिक रमेश कुमार खडका पुत्र धर्म सिंह खडका, निवासी लोउर नेहरूग्राम, थाना रायपुर है, जिनके द्वारा 01 माह पूर्व ही उक्त दुकान को शुभम पुत्र दीपक को किराये पर दिया था, जिसके द्वारा वहां कबाडी का कार्य किया जा रहा था। दुर्घटना के कारणो की जांच की जा रही है। घटना के सम्बंध में थाना रायपुर पर सम्बन्धित धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया जा रहा है।
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- भारत में शिक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत- मोहन भागवत (अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्र राष्ट्र विरोधी नहीं है। ) देश के अलग-अलग हिस्सों में पेपर लीक को लेकर जेन जी (नई पीढ़ी) के बढ़ते विरोध के बीच, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि उनकी शिकायतें जायज़ हैं और भारत की शिक्षा प्रणाली में सुधार की ज़रूरत है। हाल ही में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन और प्रदर्शनकारियों को ‘राष्ट्र-विरोधी’ कहे जाने पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि अगर जेन जी विरोध कर रहा है, तो वे राष्ट्र-विरोधी नहीं हैं। वे हमारे ही लोग हैं, हमारी अगली पीढ़ी हैं। मुझे नहीं लगता कि जेन जी ऐसी है। मुझे लगता है कि नई पीढ़ी – जेन जी और जेन अल्फा- हमारी मौजूदा पीढ़ी से ज़्यादा ईमानदार है, और देशभक्ति व सेवा की सच्ची अपील उन पर असर करती है। उन्होंने आगे कहा कि अब, जेन जीऔर जेन अल्फा सवाल पूछते हैं, उन्हें तार्किक जवाब और प्यार चाहिए,लोकतंत्र में यही तरीका है। इसे अंग्रेज़ी में ‘डिबेट’ कहते हैं, हम इसे ‘शास्त्रार्थ’ कहते हैं – वहाँ कोई बहस नहीं होती, बल्कि दो पक्ष होते हैं: ‘पूर्व’ और ‘उत्तर’। हम सभी पहलुओं को देखते हैं और हर किसी का अपना नज़रिया होता है, इसलिए हर विषय पर एक नया पहलू सामने आता है। तो, हमें कई राय और विरोधी राय मिलती हैं, जो मिलकर सच्चाई की पूरी तस्वीर बनाती हैं। ऐसा ज़रूर होना चाहिए। भागवत ने कहा कि मैं यह नहीं कहूँगा कि जेन जी को विरोध नहीं करना चाहिए, लेकिन लोकतंत्र में विरोध करने और काम करने के कुछ तरीके होते हैं। संविधान बनाने वालों ने, और डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के भाषणों में, इस बारे में संकेत दिए गए हैं। इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए। हमें यह भी देखना चाहिए कि जेन जी विरोध करने के लिए आवाज़ नहीं उठा रही है, वे ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उन्हें कुछ दिक्कतें हैं और उन्हें ठीक किया जाना चाहिए। आंदोलन मेरे या आपके ख़िलाफ़ नहीं, बल्कि सिस्टम को सुधारने के लिए होना चाहिए। एक कार्यक्रम में बोलते हुए भागवत ने कहा कि उन्हें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हालिया टकराव के सही हालात के बारे में जानकारी नहीं है, लेकिन युवाओं पर उनका भरोसा अटूट है। भागवत ने कहा कि मैं ‘जेन ज़ेड’ पर आँख बंद करके भरोसा करूँगा। उन्होंने आगे कहा कि उन्हें देश के युवाओं की नीयत और उनकी आकांक्षाओं पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा कोई कमर्शियल बिज़नेस नहीं है। समुदाय की मदद से शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकता है। शिक्षा का आर्थिक बोझ बहुत ज़्यादा है। हमें सतर्क और सक्रिय रहने की ज़रूरत है और सिस्टम का नियमित रूप से आकलन करना होगा। हमें अपने शिक्षकों को भी प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है। शिक्षा देना सिर्फ़ सरकार की ज़िम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक ज़िम्मेदारी भी है – मोहन भागवत
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